कब है नाग पंचमी ? क्या है नाग पंचमी का कालसर्प योग से संबंध ?

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When is Nag Panchami? What is the relation of Nag Panchami with Kalsarp Yoga

नाग पंचमी सावन के पवित्र महीने में पड़ने वाला एक प्रमुख पर्व है। इस दिन नाग देवता या सर्प देवता की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन रूद्राभिषेक करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। इस बार नाग पंचमी का पर्व 13 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा।

नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस बार पंचमी तिथि का प्रारंभ 12 अगस्त 2021 को दोपहर 3 बजकर 24 मिनट से होगा और पंचमी तिथि का समापन 13 अगस्त 2021 को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट पर होगा। नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 13 अगस्त को प्रातः 05 बजकर 45 मिनट से 08 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

अब जानते है काल सर्प योग और नाग पंचमी का संबंध

जब कुंडली मे सारे ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाये तब यह योग बनता है। जिसे हम सब काल सर्प योग कहते है। राहु केतु सदैव एक दूसरे के सामने होते है। जैसे यदि राहु उपस्थित है मेष राशि में तो केतु तुला में उपस्थित होंगे।

आज के समय मे काल सर्प योग के नाम पर बड़े बड़े अनुष्ठान कराये जाते है किंतु यह जानना जरूरी है कि क्या काल सर्प योग होता है। ज्योतिष के प्राचीन प्रामाणिक ग्रंथों में इसका कोई भी उल्लेख नहीं मिलता है कि काल सर्प योग कुछ होता है। हाँ एक बात जरूर है कि ग्रंथो मे सर्प योग का उल्लेख जरुर मिलता है।

राहु को मुख और केतु को पूँछ कहा जाता है एवं राहु केतु का स्वभाव भी सर्प जैसा होता है इसीलिए नाग पंचमी का संबंध राहु केतु से अधिक है।

राहु केतु की समस्याओं से बचने के उपाय

नाग पंचमी के दिन चाँदी या मिट्टी के नाग नागिन बनाकर उनकी विधिवत पूजा करना चाहिए।

काल सर्प योग की शांति के लिए भगवान शिव की पूजा करें एवं उनके मंत्रो का जप करें।

राहु केतु की समस्याओं को कम करने के लिए तामसिक आहार का प्रयोग बिल्कुल भी न करें।

नाग पंचमी की सरल पूजन विधि

नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर व्रत-उपवास का संकल्प लें।सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें। इसके बाद नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा (सोने, चांदी या तांबे से निर्मित) के सामने यह मंत्र बोलें-

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥

नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर गंध, पुष्प, धूप, दीप से पूजन करें तथा सफेद मिठाई का भोग लगाएं। सफेद कमल का फूल पूजा में रखें और यह प्रार्थना करें-

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥

इस संसार में, आकाश, स्वर्ग, झीलें, कुएँ, तालाब तथा सूर्य-किरणों में निवास करने वाले सर्प, हमें आशीर्वाद दें तथा हम सभी आपको बारम्बार नमन करते हैं।