जानिए नाग पंचमी का काल सर्प योग से क्या है संबंध साथ ही कैसे करें नाग पंचमी की पूजा

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क्या है काल सर्प योग और इसका नाग पंचमी से क्या है संबंध ?

जब कुंडली मे सारे ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाये तब यह योग बनता है। राहु केतु सदैव एक दूसरे के सामने होते है। ज्योतिष के प्राचीन प्रामाणिक ग्रंथों में इसका कोई भी उल्लेख नहीं मिलता है कि काल सर्प योग कुछ होता है। हाँ एक बात जरूर है कि ग्रंथो मे सर्प योग का वर्णन जरुर मिलता है। राहु को मुख और केतु को पूँछ कहा जाता है एवं राहु केतु का स्वभाव भी सर्प जैसा होता है इसीलिए नाग पंचमी का संबंध राहु केतु से अधिक है।

कब मनाई जाती है नाग पंचमी और क्या है पूजा का शुभ मुहूर्तनाग पंचमी का पर्व सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 25 जुलाई 2020 को पड़ रही है।
नाग पंचमी पूजा मुहूर्त सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 8 बजकर 05 मिनट तक।

कैसे करें नाग पंचमी पर पूजन :-नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद भगवान शंकर का ध्यान एवं पूजन करें। इसके बाद नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा जो चाँदी या मिट्टी की हो सकती है उसके सामने यह मंत्र बोलें-

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर गंध, पुष्प, धूप, दीप से पूजन करें तथा सफेद मिठाई का भोग लगाएं। सफेद कमल का फूल या कोई भी सफेद फूल पूजा में रखें और यह प्रार्थना करें-

सर्वे नागा: प्रीयन्तां में ये केचित् पृथिवीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।।

एस्ट्रोलॉजर सुमित तिवारी

एम. ए. एस्ट्रोलॉजी