2020 में कब मनाया जाएगा दशहरा और क्या है इसका महत्व

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2020 में कब मनाया जाएगा दशहरा और क्या है इसका महत्व

2020 में कब मनाया जाएगा दशहरा और क्या है इसका महत्व

दशहरा का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दशहरा का त्यौहार प्रत्येक वर्ष की अश्विन मास की दशमी तिथि को मनाया जाता है। अश्विन मास की दशमी को ही देवी का विधिवत पूजन करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है। इस दिन देवी महिषासुर मर्दिनी और प्रभु श्रीराम की पूजा अर्चना करना चाहिए। दशहरा के दिन मध्यान्ह पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन लोग अपने अस्त्र शस्त्र की भी पूजा करते है।

कब मनाया जाएगा दशहरा

इस बार 24 अक्टूबर को प्रातः 6 बजकर 58 मिनट तक अष्टमी है और उसके बाद नवमी लग जाएगी जो 25 अक्टूबर को प्रातः 07 बजकर 40 मिनट तक रहेगी इसके पश्चात ही दशमी तिथि प्रारंभ होगी।

क्यों मनाया जाता है दशहरा

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब दशरथनंदन भगवान श्रीराम चौदह वर्षों के वनवास में थे तो उसी समय लंकानरेश रावण ने उनकी पत्नी माँ सीता का हरण कर उन्हें लंका की अशोक वाटिका में बंदी बना कर रख लिया था। प्रभु राम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण जी जो शेषावतार है, श्री हनुमान जी सहित वानर सेना के साथ रावण की सेना से युद्ध किया। ऐसी मान्यता है कि उस समय प्रभु राम ने माँ भगवती दुर्गा की उपासना की थी और उनके आशीर्वाद से आश्विन मास की दशमी तिथि को ही रावण का वध किया था तभी से इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाने लगा। इसीलिये इसे ‘विजयादशमी’ के नाम से भी जाना जाता है।

वी दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर का वध करके विजय प्राप्त की थी

 

एक अन्य कथा भी है देवी दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर का वध करके विजय प्राप्त की थी।

प्रतीकात्मक रूप से रावण का वध करने और आतिशबाजी करना दशहरा नही है। मूलतः विजयादशमी का पर्व दस प्रकार के पापों से अपने को बचाकर रखने का संदेश है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की प्रेरणा प्रदान करता है। इन्हीं दस प्रकार की आदतों से बचना और अपनी आगे आने वाली पीढ़ी को सचेत करना ही दशहरा पर्व है।